हर उम्र पर प्राथमिकताएं भिन्न – भिन्न होती है , और होनी भी चाहिए । लेकिन उम्र का कोई भी दौर क्यूँ ना हो , लक्ष्य और शरीर इन दोनों पर बराबर ध्यान देना होगा । लक्ष्य मिल गया लेकिन शरीर हाथ से निकल गया तो भी क्या लाभ ? इसलिए दोनों के मध्य बढ़िया | संतुलन बनाईये।
ऊर्जा बचाना ही महत्वपूर्ण नहीं है , बल्कि उस ऊर्जा का सही | उपयोग करना महत्वपूर्ण है । अपनी ऊर्जा को न केवल बचाना है बल्कि सटीक रणनीति के साथ न्यूनतम ऊर्जा व्यय में चमत्कारिक परिणाम देने हैं।
हम सब इंसान हैं, और हर इंसान में कोई न कोई कमी अवश्य होती है, लेकिन ये भी बात सत्य है कि हर इंसान में कोई न कोई खूबी भी अवश्य होती है। इसलिए हम को किसी इंसान में क्या देखना है – कमी या खूबी , अच्छाई या बुराई – ये हम तय करते हैं, और हम जो ढूंढते हैं – वही बन जाते हैं।
आपकी एक चूक आपकी सारी मेहनत पर पानी फेर सकती है। इसलिए हर पल सजग रहिये। अपने लक्ष्य का नित्य – प्रति मूल्यांकन कीजिये। और हाँ , मूल्यांकन के बाद | जो भी कमी नज़र आये , उसे ईमानदारी से दूर अवश्य । । करिये , तभी उस मूल्यांकन का लाभ मिल पायेगा।
चिंता की बात ये नहीं कि लोग क्या। कहते हैं, आपमें क्या कमियां निकालते हैं, आप पर शक़ करते हैं, चिंता की बात ये है कि आप उसे दिल से लगा लेते हैं। और उन्हें गलत साबित करने के लिए पूरी ताकत झोंक देते हैं । सच तो ये है कि आप स्वयं को जितना साबित करने की कोशिश करेंगे, दुनिया उतना ही आपको गलत समझेगी, इसलिए | सब तरफ से बेपरवाह होकर अपने | लक्ष्य पर ध्यान दीजिए । दुनिया एक न एक दिन खुद गलत साबित हो जाएगी।
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